सतत विकास के मानकों पर श्री श्री यूनिवर्सिटी की वैश्विक पहचान मजबूत

 THE सस्टेनेविलिटि इम्पैक्ट रेटींस 2026 में शानदार प्रदर्शन, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व का बना वैश्विक उदाहरण

आज के समय में किसी भी विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता केवल उसकी शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं आंकी जाती, बल्कि इस बात से भी मापी जाती है कि वह समाज, पर्यावरण और मानवता के सतत विकास में कितना प्रभावी योगदान दे रहा है। इसी दृष्टि से THE सस्टेनेविलिटि इम्पैक्ट रेटींस 2026 में ओडिशा के कटक स्थित श्री श्री यूनिवर्सिटी ने अपने अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए वैश्विक, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विश्वविद्यालय की इस सफलता ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार आधारित शोध, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति उसकी प्रतिबद्धता निरंतर मजबूत हो रही है। यह रैंकिंग संस्थानों का मूल्यांकन संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals–SDGs) के आधार पर करती है और यह बताती है कि कोई विश्वविद्यालय शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से वैश्विक चुनौतियों के समाधान में कितना योगदान दे रहा है। इसी दिशा में ओडिशा के कटक स्थित श्री श्री यूनिवर्सिटी ने वर्ष 2026 की THE सस्टेनेविलिटि इम्पैक्ट रेटींस में अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के साथ न केवल अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान को मजबूत किया है, बल्कि यह भी सिद्ध किया है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सतत विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। विश्वविद्यालय की इस उपलब्धि ने उसे वैश्विक, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

वैश्विक रैंकिंग में ऐतिहासिक छलांग

THE सस्टेनेविलिटि इम्पैक्ट रेटींस के अनुसार श्री श्री यूनिवर्सिटी ने 401–600 वैश्विक श्रेणी से आगे बढ़कर 301–400 श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। यह केवल एक रैंकिंग सुधार नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की निरंतर प्रगति, दूरदर्शी नेतृत्व और सतत विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण है। राष्ट्रीय स्तर पर भी विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। भारत में उसकी रैंकिंग 24वें स्थान से सुधरकर 20वें स्थान पर पहुंच गई है। वहीं, ओडिशा में विश्वविद्यालय ने लगातार चौथा स्थान बनाए रखकर राज्य के अग्रणी उच्च शिक्षण संस्थानों में अपनी मजबूत उपस्थिति कायम रखी है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि विश्वविद्यालय ने शिक्षा, अनुसंधान, प्रशासन, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक सहभागिता को एकीकृत करते हुए विकास का एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसकी वैश्विक स्तर पर सराहना हो रही है।

शून्य भूख (SDG-2) में विश्व के अग्रणी संस्थानों में शामिल

श्री श्री यूनिवर्सिटी का सबसे उल्लेखनीय प्रदर्शन एसडीजी-2 (Zero Hunger/शून्य भूख) के अंतर्गत देखने को मिला। विश्वविद्यालय ने इस श्रेणी में विश्व स्तर पर 39वां स्थान हासिल किया है। भारत में उसे तीसरा स्थान तथा ओडिशा में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि खाद्य सुरक्षा, पोषण, टिकाऊ कृषि, ग्रामीण विकास और सामुदायिक सहभागिता के क्षेत्र में विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे प्रयासों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। विश्वविद्यालय समय-समय पर किसानों, ग्रामीण समुदायों, स्वयंसेवी संगठनों और विद्यार्थियों के साथ मिलकर ऐसे कार्यक्रम संचालित करता है, जिनका उद्देश्य खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना, टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना तथा पोषण संबंधी जागरूकता फैलाना है।

जलवायु कार्रवाई के क्षेत्र में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन

जलवायु परिवर्तन आज पूरी दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। ऐसे समय में श्री श्री यूनिवर्सिटी ने एसडीजी-13 (Climate Action/जलवायु कार्रवाई) के अंतर्गत भी प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। विश्वविद्यालय को इस श्रेणी में वैश्विक स्तर पर 101–200 श्रेणी, भारत में नौवां तथा ओडिशा में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ। विश्वविद्यालय परिसर में हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना, जल संरक्षण, वृक्षारोपण, कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक उपयोग में कमी तथा पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनेक अभियान नियमित रूप से संचालित किए जाते हैं। इसके साथ ही छात्रों और शोधार्थियों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों तथा उसके समाधान से जुड़े शोध एवं नवाचार के लिए भी प्रोत्साहित किया जाता है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को नई दिशा

एसडीजी-4 (Quality Education/गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) के अंतर्गत भी श्री श्री यूनिवर्सिटी ने वैश्विक स्तर पर 101–200 श्रेणी में स्थान प्राप्त किया। भारत में विश्वविद्यालय 16वें स्थान पर रहा, जबकि ओडिशा में उसे चौथा स्थान मिला। विश्वविद्यालय का मानना है कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व के विकास का आधार है। यही कारण है कि यहां अकादमिक उत्कृष्टता के साथ-साथ नैतिक मूल्यों, नेतृत्व क्षमता, उद्यमिता, नवाचार, योग, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक उत्तरदायित्व पर समान रूप से बल दिया जाता है।

जैव विविधता और स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि

एसडीजी-15 (Life on Land/स्थलीय जीवन) के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने भारत में 11वां स्थान तथा ओडिशा में तीसरा स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का परिणाम है। इसी प्रकार एसडीजी-7 (Affordable and Clean Energy/सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा) में भी विश्वविद्यालय ने वैश्विक स्तर पर 101–200 श्रेणी में स्थान बनाया। भारत में इसकी रैंक 18वीं तथा ओडिशा में चौथी रही। परिसर में ऊर्जा दक्षता, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में विश्वविद्यालय लगातार कार्य कर रहा है।

शिक्षा, शोध और समाज को जोड़ने का प्रयास

विश्वविद्यालय का मानना है कि उच्च शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान खोजने वाले जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। इसी सोच के तहत श्री श्री यूनिवर्सिटी ने शिक्षा को शोध, नवाचार और सामुदायिक विकास से जोड़ा है। विश्वविद्यालय में संचालित अनेक अनुसंधान परियोजनाएं सीधे समाज की आवश्यकताओं से जुड़ी हैं। स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि, ग्रामीण विकास, कौशल विकास और सामाजिक जागरूकता जैसे क्षेत्रों में किए जा रहे कार्य स्थानीय समुदायों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं। छात्रों को भी विभिन्न सामाजिक परियोजनाओं में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे उनमें नेतृत्व और सेवा की भावना विकसित होती है।

सतत विकास को संस्थागत संस्कृति का हिस्सा

श्री श्री यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां सतत विकास केवल नीतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्वविद्यालय की कार्यसंस्कृति का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। हरित परिसर, पर्यावरण-अनुकूल बुनियादी ढांचा, ऊर्जा संरक्षण, जल प्रबंधन, सामाजिक सेवा कार्यक्रम, जागरूकता अभियान और अंतरविषयक शोध गतिविधियां इसी सोच का प्रतिबिंब हैं। विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे युवाओं को तैयार करना है जो केवल सफल पेशेवर ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार वैश्विक नागरिक भी बनें और अपने ज्ञान का उपयोग समाज तथा पर्यावरण के हित में कर सकें।

क्या है THE सस्टेनेविलिटि इम्पैक्ट रेटींस ? 

टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) सस्टेनेविलिटि इम्पैक्ट रेटींस विश्व की सबसे प्रतिष्ठित वैश्विक रैंकिंग में से एक है, जो विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के आधार पर करती है। इसमें केवल शैक्षणिक गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि शोध, सामाजिक प्रभाव, पर्यावरण संरक्षण, संस्थागत प्रशासन, उद्योग सहयोग, सामुदायिक भागीदारी और वैश्विक साझेदारी जैसे पहलुओं को भी महत्व दिया जाता है। इसी कारण इस रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन किसी भी विश्वविद्यालय की वैश्विक विश्वसनीयता, सामाजिक प्रतिबद्धता और भविष्य की दिशा का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।

वैश्विक उत्कृष्टता की ओर निरंतर बढ़ते कदम

THE सस्टेनेविलिटि इम्पैक्ट रेटींस 2026 में श्री श्री यूनिवर्सिटी की उल्लेखनीय उपलब्धि यह स्पष्ट करती है कि संस्थान शिक्षा को समाज और प्रकृति के साथ जोड़ते हुए विकास का एक संतुलित मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। वैश्विक रैंकिंग में मिली यह सफलता विश्वविद्यालय की दूरदर्शी सोच, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार आधारित शोध, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व का सामूहिक परिणाम है। आने वाले वर्षों में भी यदि विश्वविद्यालय इसी प्रकार शिक्षा, अनुसंधान, सामुदायिक सहभागिता और सतत विकास के क्षेत्रों में अपने प्रयासों को आगे बढ़ाता है, तो उसके लिए विश्व के अग्रणी विश्वविद्यालयों की श्रेणी में और अधिक मजबूत स्थान बनाना स्वाभाविक होगा। यह उपलब्धि केवल श्री श्री यूनिवर्सिटी के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय उच्च शिक्षा प्रणाली के लिए भी गर्व और प्रेरणा का विषय है।


Comments

Popular posts from this blog

Ganesh Utsav 2025: Ten Days of Devotion, Culture and Celebration at Sri Sri University

Garima Rasali: From Challenges to Triumph, the Emerging Nursing Queen

हार से सीख, जीत का ताज : एसएसयु बना बास्केटबॉल चैंपियन