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Showing posts from January, 2026

फूलों में उतरी करुणा: श्री श्री विश्वविद्यालय का ‘धरा अनुग्रह’

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 माघ महीने की अंतिम ठंडी हवाओं के बीच जब सामान्यतः प्रकृति विश्राम की स्थिति में होती है, उसी समय कटक के समीप स्थित श्री श्री विश्वविद्यालय का परिसर असमय पुष्प-वसंत की आभा से सराबोर हो उठा है। ठंड की हल्की-सी सिहरन के बीच रंग-बिरंगे फूलों की यह अप्रत्याशित बहार किसी स्वप्नलोक जैसी प्रतीत होती है। ऐसा लगता है मानो ऋतुओं का क्रम स्वयं यहाँ आकर ठहर गया हो और फागुन अपनी संपूर्ण भव्यता के साथ समय से पहले धरती पर उतर आया हो। खिले हुए फूल अपनी मोहक आकृतियों और सुवास से आगंतुकों को अनायास ही आकर्षित करते हैं, मानो वे मौन भाषा में यह कह रहे हों कि प्रकृति को देखने, समझने और सहेजने का यही उपयुक्त क्षण है। इन दिनों श्री श्री विश्वविद्यालय का समूचा परिसर एक जीवंत, सजीव और संवेदनशील पुष्प उद्यान का रूप धारण कर चुका है। हर दिशा में फैली फूलों की सुगंध वातावरण को इस प्रकार सुवासित कर रही है कि यहाँ आने वाला प्रत्येक व्यक्ति कुछ क्षणों के लिए अपने भीतर उतरने को विवश हो जाता है। रंगों की विविधता, पंखुड़ियों की कोमलता और हरियाली की ताजगी मिलकर ऐसा दृश्य रचती है, जहाँ सौंदर्य केवल देखा नहीं जाता, बल...

The Ancient Light of Education Rises from the East

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Sri Sri University launches the Faculty of Eastern  Knowledge Systems (The dignitaries are unveiling the Faculty of Eastern Knowledge Systems - FEKS) For decades, Western education and culture were widely seen as the definitive standards of progress and civilization. Today, that long-held perception is undergoing a profound shift. Across the world, there is a renewed curiosity and respect for the depth, wisdom and civilizational strength of ancient Eastern knowledge traditions, particularly those rooted in India. Marking a historic step in this global reawakening, Sri Sri University, Cuttack , on January 16 , launched a pioneering academic initiative: the ‘ Faculty of Eastern Knowledge Systems (FEKS) .’ This landmark development signals not just an institutional milestone, but a broader cultural and intellectual moment, one that reaffirms the relevance of Eastern wisdom in addressing the complex challenges of the modern world. A First-of-Its-Kind Academic Initiative    ...

जब युवा जागता है, तब राष्ट्र आगे बढ़ता है

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  स्वामी विवेकानंद के विचारों से गूंजा श्री श्री विश्वविद्यालय जब किसी राष्ट्र का युवा स्वयं को पहचानने लगता है , तब इतिहास करवट लेता है। जब चेतना सोई हुई नहीं रहती , बल्कि प्रश्न करती है , कर्म करती है और समाज से जुड़ती है , तब परिवर्तन केवल विचार नहीं रह जाता , वह यथार्थ बन जाता है। भारत की ऐसी ही चेतना को शब्द , स्वर और दिशा देने वाले युगपुरुष स्वामी विवेकानंद आज भी हमारे समय के उतने ही प्रासंगिक मार्गदर्शक हैं , जितने वे अपने युग में थे। उनका ओजस्वी संदेश : “ उठो , जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत ” आज भी युवाओं की नसों में ऊर्जा भरने की क्षमता रखता है। इसी चेतना , उसी प्रेरणा और उसी आत्मबोध को जीवंत करने के उद्देश्य से श्री श्री विश्वविद्यालय और इसके अंतर्गत श्री श्री आयुर्वेद महाविद्यालय में 12 जनवरी 2026 को अत्यंत गरिमा , उत्साह और भावनात्मक गहराई के साथ विवेकानंद जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय युवा दिवस आयोजित की गई। यह आयोजन केवल एक औपचारिक तिथि पालन नहीं था , बल्कि यह युवाओं को उनके कर्तव्य , सामर्थ्य और सामाजिक उत्तरदायित्व का बोध कराने वाला एक सशक्त प्रयास था , जिसमें शि...

ଓପନ୍ ଡେ-2026: ଆଗାମୀ ପିଢ଼ିକୁ କୃଷି ସହ ଯୋଡ଼ିବା ଲକ୍ଷ୍ୟ

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ଆଧୁନିକ କୃଷି , ଉଦ୍ଭାବନ ଓ ରୋଜଗାରର ନୂଆ ଦିଗ “ ଭାରତ ଏକ କୃଷିପ୍ରଧାନ ଦେଶ । ତେଣୁ ଏଠାରେ ଜନ୍ମଲାଭ କରୁଥିବା ପ୍ରତ୍ୟେକ ପିଲା କୃଷି ସମ୍ପର୍କରେ ଜ୍ଞାନ ଆହରଣ କରିବା ଆବଶ୍ୟକ । ପ୍ରାଥମିକ ଅବସ୍ଥାରେ ବିଦ୍ୟାର୍ଥୀମାନେ ଏଥିପ୍ରତି କିଭଳି ଆଗ୍ରହୀ ହେବେ , ସେଥିପାଇଁ ସେମାନଙ୍କୁ ଭିନ୍ନ ଭିନ୍ନ କୌଶଳ ଏବଂ ଆକର୍ଷଣୀୟ ମଡେଲ୍ ଜରିଆରେ କୃଷିର ସକାରାତ୍ମକ ଦିଗ ପ୍ରତି ଆକୃଷ୍ଟ କରିବା ଆବଶ୍ୟକ । ” କଟକସ୍ଥିତ ଶ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ବିଶ୍ୱବିଦ୍ୟାଳୟ ଅନ୍ତର୍ଗତ କୃଷି ବିଭାଗ ପକ୍ଷରୁ ଆୟୋଜିତ ‘ ଓପନ୍ ଡେ-2026 ’ ଅବସରରେ ନିଜ ଅଭିଭାଷଣରେ କିଛି ଏହିପରି କହିଛନ୍ତି ବିଶ୍ୱବିଦ୍ୟାଳୟ କୁଳପତି ପ୍ରଫେସର ଡ. ତେଜପ୍ରତାପ । ତେଣୁ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଭାରତୀୟ ବିଦ୍ୟାର୍ଥୀ କୃଷି ସମ୍ପର୍କରେ ପ୍ରାଥମିକ ଜ୍ଞାନ ଆହରଣ କରିବା ଆବଶ୍ୟକ ଏବଂ ସେ ଦିଗରେ ସେମାନଙ୍କ ଧ୍ୟାନ ଆକର୍ଷଣ କରିବାକୁ ଯାହାକିଛି କରିବା କଥା, ସେମାନେ ଅଧ୍ୟୟନ କରୁଥିବା ଶିକ୍ଷାନୁଷ୍ଠାନ କର୍ତ୍ତୃପକ୍ଷ ତାହା କରିବା ଆବଶ୍ୟକ । ସେମାନଙ୍କୁ ଭିନ୍ନ ଭିନ୍ନ କୌଶଳ ଏବଂ ଆକର୍ଷଣୀୟ ମଡେଲ୍ ଜରିଆରେ କୃଷିର ସକାରାତ୍ମକ ଦିଗ ପ୍ରତି ଆକୃଷ୍ଟ କରିବା ଆଜି ସମୟର ଆବଶ୍ୟକତା ବୋଲି କହିଥିଲେ କୁଳପତି ଡ. ତେଜପ୍ରତାପ । ସେପଟେ ନିଜ ଅଭିଭାଷଣରେ କୁଳସଚିବ ପ୍ରଫେସର ଡ. ଅନିଲ କୁମାର ଶର୍ମା କହିଥିଲେ, “ ସମ୍ପ୍ରତି କୃଷି କ୍ଷେତ୍ର ଆଡ଼କୁ ମୁହଁ ଫେରାଇବାର ସମୟ ଆସିଛି । ତେବେ ସାଧାରଣ ପାରମ୍ପରିକ ଶୈଳ...