छात्र-केंद्रित शिक्षा और समग्र विकास के लिए श्री श्री विश्वविद्यालय को मिला प्रतिष्ठित सम्मान

 


क्या शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी दिलाना है ? क्या विश्वविद्यालयों की सफलता केवल उनके प्लेसमेंट आंकड़ों से मापी जानी चाहिए ? या फिर शिक्षा का वास्तविक अर्थ ऐसे व्यक्तियों का निर्माण है, जो ज्ञानवान होने के साथ-साथ संवेदनशील, जिम्मेदार और समाज के प्रति जागरूक भी हों ? आज जब उच्च शिक्षा का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है और संस्थानों के सामने छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करने की चुनौती है, ऐसे समय में कुछ विश्वविद्यालय शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उसे जीवन-निर्माण की प्रक्रिया के रूप में देखते हैं। ओडिशा के कटक स्थित श्री श्री विश्वविद्यालय इसी सोच का एक सशक्त उदाहरण बनकर उभरा है। विश्वविद्यालय के इसी विद्यार्थी-केंद्रित और समग्र शिक्षा दृष्टिकोण को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी पहचान मिली है। हाल ही में भुवनेश्वर में आयोजित आर्गस एजुकेशन नेक्स्ट अवार्ड्स (सीज़न-5) में श्री श्री विश्वविद्यालय को प्रतिष्ठित आर्गस एक्सीलेंस इन होलिस्टिक एजुकेशन अवार्ड 2026” से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्टता, नवाचार, अनुसंधान, कौशल विकास और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

सम्मान से अधिक, एक विचारधारा की पहचान


यह पुरस्कार केवल एक ट्रॉफी या उपलब्धि नहीं है। यह उस शिक्षा-दर्शन की स्वीकृति है जो विद्यार्थियों को केवल पेशेवर सफलता के लिए नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। यह सम्मान ओडिशा सरकार के स्कूल एवं जनशिक्षा, अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास, अल्पसंख्यक एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री श्री नित्यानंद गोंड द्वारा शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में प्रदान किया गया। श्री श्री विश्वविद्यालय की ओर से यह पुरस्कार प्रो. केशरी सिंह, डीन (अनुसंधान एवं विकास एवं शैक्षणिक कार्य), निदेशक-आईक्यूएसी तथा प्रबंधन अध्ययन संकाय की वरिष्ठ प्राध्यापिका ने ग्रहण किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की जनसंपर्क प्रबंधक सुश्री सोनाली दास भी उपस्थित थीं।

शिक्षा जो केवल मस्तिष्क नहीं, व्यक्तित्व का भी विकास करे


आज अधिकांश शिक्षण संस्थान अकादमिक उपलब्धियों पर जोर देते हैं, लेकिन श्री श्री विश्वविद्यालय ने शिक्षा को एक व्यापक दृष्टिकोण से देखा है। यहां विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास के साथ-साथ भावनात्मक संतुलन, नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक मूल्यों और आंतरिक आत्मविश्वास के विकास पर भी समान बल दिया जाता है। विश्वविद्यालय का मानना है कि भविष्य के नेता केवल किताबों से नहीं बनते; वे अनुभव, संवाद, सेवा, नवाचार और आत्म-जागरूकता से तैयार होते हैं। यही कारण है कि यहां शिक्षा का वातावरण बहुआयामी और अनुभव-आधारित है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की भावना को व्यवहार में उतारने वाला संस्थान


राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 ने भारतीय शिक्षा व्यवस्था को अधिक लचीला, बहुविषयक और छात्र-केंद्रित बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। श्री श्री विश्वविद्यालय उन चुनिंदा संस्थानों में शामिल है जिन्होंने इस दृष्टिकोण को केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे अपने शैक्षणिक ढांचे का हिस्सा बनाया। बहुविषयक अध्ययन, कौशल-आधारित शिक्षा, शोध एवं नवाचार, उद्योग-अकादमिक सहयोग, इंटर्नशिप और अनुभवात्मक अधिगम जैसे पहलुओं को विश्वविद्यालय ने प्रभावी ढंग से अपनाया है। इसके परिणामस्वरूप विद्यार्थी केवल विषय-विशेषज्ञ नहीं बनते, बल्कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने में भी सक्षम होते हैं।

भारतीय ज्ञान परंपरा और वैश्विक दृष्टिकोण का संगम


श्री श्री विश्वविद्यालय की एक विशेषता यह भी है कि यहां आधुनिक शिक्षा और भारतीय ज्ञान परंपरा का संतुलित समन्वय देखने को मिलता है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करते हुए उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों और मानवीय मूल्यों से भी जोड़े रखता है। आज जब मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और जीवन-संतुलन जैसे विषय युवाओं के लिए महत्वपूर्ण बन चुके हैं, तब विश्वविद्यालय का समग्र शिक्षा मॉडल और अधिक प्रासंगिक दिखाई देता है।

नेतृत्व की प्रतिक्रिया: यह यात्रा अभी जारी है


इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्षा प्रो. रजिता कुलकर्णी, कुलपति प्रो. तेज परताप तथा कार्मिक निदेशक स्वामी सत्यचैतन्य ने कहा कि यह सम्मान उन निरंतर प्रयासों का परिणाम है, जिनके माध्यम से विश्वविद्यालय शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि जीवन-परिवर्तन का माध्यम बनाने के लिए कार्य कर रहा है। उनके अनुसार, समग्र शिक्षा की अवधारणा ही विश्वविद्यालय की मूल पहचान है और यह पुरस्कार उसी सोच की राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृति का प्रतीक है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय आगे भी शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।

एक उपलब्धि, अनेक प्रेरणाएं


यह सम्मान केवल विश्वविद्यालय प्रशासन की उपलब्धि नहीं है। यह उन हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों की पहचान है जिन्होंने गुणवत्तापूर्ण और मूल्य-आधारित शिक्षा के इस मिशन को आगे बढ़ाया है। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जहां प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, वहीं श्री श्री विश्वविद्यालय यह साबित कर रहा है कि वास्तविक उत्कृष्टता केवल अकादमिक परिणामों में नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्तित्वों के निर्माण में है जो समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान दे सकें। आर्गस एक्सीलेंस इन होलिस्टिक एजुकेशन अवार्ड 2026” इसी विश्वास की एक सशक्त पुष्टि है कि शिक्षा का भविष्य केवल ज्ञान देने में नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने में निहित है।

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