अपने भीतर के गुणों को पहचानना ही सफलता की वास्तविक परिभाषा
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर श्री श्री विश्वविद्यालय में प्रेरणादायक संवाद
समाज में महिलाओं की भूमिका केवल परिवार या कार्यस्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन की महत्वपूर्ण वाहक भी हैं। आज की महिला नेतृत्व, शिक्षा, उद्यमिता और सामाजिक सेवा, हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है। इसी सोच और प्रेरणा को केंद्र में रखते हुए ओड़िशा के कटक स्थित श्री श्री विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के महिला नेतृत्व मंच ‘चर्चिका’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं की क्षमताओं को पहचानना, उन्हें प्रेरित करना और समाज में उनके योगदान को सम्मानित करना था। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की लगभग 300 कर्मजीवी महिलाओं ने भाग लिया और एक सार्थक संवाद का हिस्सा बनीं।
‘गिव टू गेन’: इस
वर्ष का प्रेरणादायक विषय
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का विषय था ‘गिव टू गेन’ (कुछ पाने के लिए कुछ देना होगा)। यह विषय इस विचार को सामने लाता है कि जीवन में सच्ची सफलता केवल प्राप्त करने से नहीं, बल्कि समाज को कुछ लौटाने से मिलती है। कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि जब व्यक्ति अपने अनुभव, ज्ञान और समय को दूसरों के साथ साझा करता है, तब वह केवल व्यक्तिगत रूप से ही नहीं, बल्कि सामूहिक रूप से भी प्रगति करता है। विशेष रूप से महिलाओं के संदर्भ में यह विचार अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि महिलाएँ अक्सर अपने परिवार, समाज और कार्यस्थल के लिए निरंतर योगदान देती रहती हैं। ऐसे में यह विषय महिलाओं के योगदान को सम्मान देने के साथ-साथ उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित भी करता है।
सफलता की असली पहचान: अपने भीतर के गुण
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित दैनिक ‘सम्बाद’ की संपादिका
तथा सम्बाद ग्रुप की कार्यकारी निदेशिका श्रीमती तनया पटनायक ने अपने विचार साझा
करते हुए कहा कि सफलता की वास्तविक परिभाषा व्यक्ति के भीतर मौजूद गुणों में छिपी
होती है। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग सफलता को केवल पद, प्रसिद्धि
या आर्थिक उपलब्धियों से जोड़कर देखते हैं, जबकि वास्तविक
सफलता उस क्षमता में होती है जो व्यक्ति के अंदर छिपी होती है। उनके अनुसार हर
व्यक्ति के भीतर कुछ विशेष प्रतिभाएँ और गुण होते हैं। यदि हम उन गुणों को पहचानकर
सही दिशा में उपयोग करें, तो जीवन में बड़ी उपलब्धियाँ
प्राप्त की जा सकती हैं। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें अपने
आत्मविश्वास को मजबूत करना चाहिए और अपने सपनों को पूरा करने के लिए साहस के साथ
आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के
लिए महिलाओं की भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। जब महिलाएँ अपने ज्ञान और अनुभव से
दूसरों को प्रेरित करती हैं, तब वे एक मजबूत और जागरूक समाज
के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
छोटी शुरुआत, बड़ा परिणाम
कार्यक्रम में भुवनेश्वर स्थित प्रतिष्ठित अंग्रेज़ी माध्यम विद्यालय मदर्स
पब्लिक स्कूल की संस्थापिका श्रीमती पली पटनायक ने अपने जीवन के अनुभव साझा किए। उन्होंने
बताया कि उनका विद्यालय एक समय केवल 20 विद्यार्थियों के साथ शुरू हुआ था।
उस समय संसाधन सीमित थे, लेकिन लक्ष्य स्पष्ट था- कर्मजीवी महिलाओं के बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करना। समय के साथ
लगातार मेहनत, समर्पण और धैर्य के कारण वह छोटा सा प्रयास आज
एक बड़े और प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान के रूप में विकसित हो चुका है। अपने अनुभव
से उन्होंने यह संदेश दिया कि किसी भी बड़ी उपलब्धि की शुरुआत छोटी होती है। महत्वपूर्ण
यह है कि व्यक्ति अपने लक्ष्य पर विश्वास बनाए रखे और निरंतर प्रयास करता रहे। उन्होंने
कहा कि धैर्य और निरंतर प्रयास ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं।
कार्यक्रम में श्री श्री विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्षा तथा ‘चर्चिका’ की
अध्यक्षा प्रोफेसर रजिता कुलकर्णी ने कार्य और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए
रखने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग पेशेवर जीवन और
व्यक्तिगत जीवन को अलग-अलग मानते हैं, लेकिन वास्तव में दोनों एक-दूसरे से
जुड़े होते हैं। यदि व्यक्ति इन दोनों के बीच संतुलन बनाए रखता है, तो वह अपने जीवन को अधिक संतोषजनक और सफल बना सकता है। उन्होंने यह भी कहा
कि संतुलित जीवन व्यक्ति को मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाता है। जब
व्यक्ति अपने काम और परिवार दोनों को समय देता है, तब वह
जीवन की चुनौतियों का सामना अधिक आत्मविश्वास के साथ कर सकता है।
महिलाओं के लिए संवाद का सशक्त मंच
इस कार्यक्रम की एक विशेषता यह थी कि इसमें केवल वक्ताओं के विचार ही नहीं, बल्कि उपस्थित महिलाओं की सक्रिय सहभागिता भी देखने को मिली। कार्यक्रम के दौरान कई प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए और यह बताया कि किस प्रकार उन्होंने अपने जीवन की चुनौतियों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य हासिल किए। इस प्रकार का संवाद महिलाओं के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करता है, जहाँ वे एक-दूसरे से प्रेरणा प्राप्त कर सकती हैं और अपने अनुभवों से सीख सकती हैं।
सफल आयोजन में सभी का योगदान
कार्यक्रम के अंत में एफसीबीएस की संकायाध्यक्षा प्रोफेसर डॉ. रेखा सिंघल ने
धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन एफएसीआईएस विभाग की सहायक
प्राध्यापिका डॉ. मधुमिता दास ने किया। ‘चर्चिका’ फोरम की सभी सदस्याओं ने
कार्यक्रम के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसे सफल बनाने के लिए सक्रिय
सहयोग दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तेजपरताप, कुलसचिव प्रोफेसर अनिल कुमार शर्मा, कार्मिक निदेशक स्वामी
सत्यचैतन्य तथा मानव संसाधन विभाग के उपनिदेशक ज्योतिरंजन गड़नायक ने भी ‘चर्चिका’
फोरम की पूरी टीम को बधाई दी और उनके प्रयासों की सराहना की।
आत्मविश्वास और योगदान से ही आगे बढ़ेगा समाज
यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि महिलाओं की शक्ति, आत्मविश्वास और नेतृत्व को पहचानने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था। ‘गिव टू गेन’ का संदेश हमें यह सिखाता है कि जीवन में
आगे बढ़ने के लिए केवल अपने बारे में सोचना पर्याप्त नहीं है। जब व्यक्ति अपने
ज्ञान, अनुभव और संसाधनों को दूसरों के साथ साझा करता है,
तभी वह वास्तविक सफलता प्राप्त करता है। महिलाएँ यदि अपने भीतर
मौजूद गुणों को पहचानकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें, तो वे
न केवल अपने जीवन में सफलता प्राप्त कर सकती हैं, बल्कि समाज
को भी नई दिशा दे सकती हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज महिलाओं की प्रतिभा और
क्षमता को पहचानते हुए उन्हें आगे बढ़ने के लिए समान अवसर प्रदान करे। जब महिलाएँ
सशक्त होंगी, तभी समाज और राष्ट्र भी सशक्त होगा।




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