मिशन क्लीन कोस्ट 2026: जब लहरों की मौन पुकार बनी युवाओं का ज्वलंत जनसंकल्प
पुरी का पेंठकाटा बीच उस दिन केवल एक समुद्री तट नहीं था, बल्कि जागरूकता, सेवा और संकल्प का जीवंत मंच बन गया था। रेत पर बिखरी पॉलिथीन, टूटी प्लास्टिक बोतलें और कचरे के ढेर प्रकृति की उस पीड़ा को व्यक्त कर रहे थे, जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं। लहरें आती रहीं, किनारे से टकराती रहीं, पर वे स्वयं अपने घावों को नहीं भर सकतीं। इस मौन पुकार को सुनते हुए कटकस्थित श्री श्री विश्वविद्यालय अन्तर्गत ओडिशा राज्य भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की रोवर एवं रेंजर इकाई ने ‘वर्ल्ड थिंकिंग डे 2026’ के अवसर पर ‘मिशन क्लीन कोस्ट’ का आयोजन किया । एक ऐसा अभियान, जिसने केवल तट की सफाई नहीं की, बल्कि पर्यावरण चेतना की लौ भी प्रज्वलित की। सुबह की ताज़गी भरी हवा के बीच जब रोवर्स और रेंजर्स तट पर पहुँचे, तो उनके भीतर सेवा-भाव और जिम्मेदारी का अद्भुत समन्वय दिखाई दे रहा था। हाथों में दस्ताने, कंधों पर थैले और मन में प्रकृति के प्रति समर्पण लेकर उन्होंने तट की सफाई प्रारंभ की। प्लॉगिंग के माध्यम से लगभग 200 किलोग्राम प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट एकत्रित किया गया। यह केवल एक आँकड़ा नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रमाण था कि यदि युवा ठान लें, तो किसी भी समस्या का समाधान संभव है। हर उठाया गया प्लास्टिक का टुकड़ा केवल कचरा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ठोस कदम था।
सफाई के साथ-साथ जागरूकता इस अभियान का मूल उद्देश्य था। रोवर्स और रेंजर्स ने पर्यटकों, स्थानीय दुकानदारों और आसपास के निवासियों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने समझाया कि एकल-उपयोग प्लास्टिक समुद्री जीवों के लिए कितना घातक है, किस प्रकार यह जल और मिट्टी को प्रदूषित करता है और अंततः मानव जीवन को भी प्रभावित करता है। छोटे-छोटे प्लास्टिक कण समुद्री जीवों के शरीर में पहुँचकर उनके जीवन को संकट में डाल देते हैं और वही प्लास्टिक सूक्ष्म रूप में हमारे भोजन-श्रृंखला का हिस्सा बन जाता है। इन तथ्यों ने उपस्थित लोगों को गहराई से सोचने पर विवश किया और कई लोगों ने प्लास्टिक का उपयोग कम करने का संकल्प लिया। इस अभियान को प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सत्यब्रत सामल के मार्गदर्शन से प्रेरणा और दिशा मिली, जिन्हें ‘ओडिशा के क्लाइमेट मैन’ के नाम से जाना जाता है। उनकी उपस्थिति ने युवाओं के उत्साह को और प्रखर किया तथा यह विश्वास दिलाया कि छोटे प्रयास भी बड़े परिवर्तन की नींव बन सकते हैं। श्री श्री विश्वविद्यालय के इको क्लब ने इस कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई, जबकि पुरी नगरपालिका ने प्रशासनिक अनुमति और आवश्यक सहयोग प्रदान किया। यह समन्वय दर्शाता है कि जब शैक्षणिक संस्थान, प्रशासन और समाज एक साथ आते हैं, तो सकारात्मक परिवर्तन निश्चित हो जाता है।
डॉ. संदीप राउत के नेतृत्व में, डॉ. लोपामुद्रा जेना, डॉ. कल्याणी प्रधान और शैख जिसान अख्तर के समन्वय से यह कार्यक्रम सुव्यवस्थित और प्रभावशाली रूप से सम्पन्न हुआ। उस्ती फाउंडेशन और पुरी के स्पंदन टीम की सहभागिता ने इस अभियान को सामूहिक जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया। विश्वविद्यालय के माननीय कुलाध्यक्षा प्रोफेसर रजिता कुलकर्णी, कुलपति प्रोफेसर तेजपरताप, कार्मिक निदेशक स्वामी सत्यचैतन्य तथा छात्र कल्याण संकाय के संकायाध्यक्ष प्रोफेसर जय प्रकाश भट्ट के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने युवाओं के आत्मविश्वास को और सुदृढ़ किया। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों- विशेषकर जलवायु कार्रवाई और स्थलीय जीवन की रक्षा की भावना के अनुरूप थी। प्लास्टिक प्रदूषण को कम करना केवल स्वच्छता का विषय नहीं, बल्कि जलवायु संतुलन, जैव विविधता संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। ‘मिशन क्लीन कोस्ट 2026’ ने यह सिद्ध कर दिया कि युवा केवल भविष्य के नागरिक नहीं, बल्कि वर्तमान के परिवर्तनकारी नेतृत्वकर्ता भी हैं। कार्यक्रम के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे एकल- उपयोग प्लास्टिक का त्याग करेंगे, समाज में पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाएँगे और स्वच्छ तथा हरित तट के निर्माण के लिए निरंतर प्रयासरत रहेंगे। उस दिन पेंठकाटा बीच ने केवल स्वच्छता ही नहीं देखी, बल्कि जागरूकता, सहयोग और प्रतिबद्धता की एक नई कहानी भी देखी। मिशन क्लीन कोस्ट 2026 इस विश्वास का प्रतीक बन गया कि जब युवा जागते हैं, तो प्रकृति मुस्कुराती है और भविष्य सुरक्षित बनता है।



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