फूलों में उतरी करुणा: श्री श्री विश्वविद्यालय का ‘धरा अनुग्रह’
माघ महीने की अंतिम ठंडी हवाओं के बीच जब सामान्यतः प्रकृति विश्राम की स्थिति में होती है, उसी समय कटक के समीप स्थित श्री श्री विश्वविद्यालय का परिसर असमय पुष्प-वसंत की आभा से सराबोर हो उठा है। ठंड की हल्की-सी सिहरन के बीच रंग-बिरंगे फूलों की यह अप्रत्याशित बहार किसी स्वप्नलोक जैसी प्रतीत होती है। ऐसा लगता है मानो ऋतुओं का क्रम स्वयं यहाँ आकर ठहर गया हो और फागुन अपनी संपूर्ण भव्यता के साथ समय से पहले धरती पर उतर आया हो। खिले हुए फूल अपनी मोहक आकृतियों और सुवास से आगंतुकों को अनायास ही आकर्षित करते हैं, मानो वे मौन भाषा में यह कह रहे हों कि प्रकृति को देखने, समझने और सहेजने का यही उपयुक्त क्षण है।
इन दिनों श्री श्री विश्वविद्यालय का समूचा परिसर एक जीवंत, सजीव और संवेदनशील पुष्प उद्यान का रूप धारण कर चुका है। हर दिशा में फैली फूलों की सुगंध वातावरण को इस प्रकार सुवासित कर रही है कि यहाँ आने वाला प्रत्येक व्यक्ति कुछ क्षणों के लिए अपने भीतर उतरने को विवश हो जाता है। रंगों की विविधता, पंखुड़ियों की कोमलता और हरियाली की ताजगी मिलकर ऐसा दृश्य रचती है, जहाँ सौंदर्य केवल देखा नहीं जाता, बल्कि अनुभव किया जाता है। इसी अनुभूति को साकार रूप देने के उद्देश्य से श्री श्री विश्वविद्यालय ने अपने इतिहास में पहली बार एक भव्य पुष्प प्रदर्शनी का आयोजन किया है, जिसे अत्यंत सार्थक नाम दिया गया है - ‘धरा अनुग्रह’।
यह पाँच दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी 28 जनवरी से आरंभ होकर 1 फरवरी तक आयोजित की जा रही है और इसका आयोजन विश्वविद्यालय के कृषि संकाय द्वारा किया गया है।
अपने नाम के अनुरूप यह प्रदर्शनी धरती के प्रति कृतज्ञता और करुणा का भाव प्रस्तुत करती है। ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं माता वसुंधरा अपने अनुग्रह से इस भूमि को पुष्पों के माध्यम से आशीर्वादित कर रही हों।
यह आयोजन केवल फूलों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, मानव और चेतना के बीच के गहरे संबंध को उजागर करता है।
इस ऐतिहासिक पुष्प प्रदर्शनी में 17 विभिन्न प्रजातियों के अंतर्गत 100 से अधिक प्रकार के पौधों को प्रदर्शित किया गया है। लगभग 10,000 गमलों में सजे ये फूल 45 विशिष्ट और सृजनात्मक डिस्प्ले के माध्यम से प्रस्तुत किए गए हैं, जो ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ संस्था की 45 वर्षों की प्रेरणादायक यात्रा का प्रतीक हैं। प्रत्येक डिस्प्ले अपने आप में एक कथा कहता है: सेवा, साधना, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों की कथा। इस प्रकार ‘धरा अनुग्रह’ प्रकृति और आध्यात्मिक चेतना का एक दुर्लभ संगम बनकर उभरी है।
शहरीकरण के तीव्र दौर में जहाँ हरियाली निरंतर सिमटती जा रही है, ऐसे समय में श्री श्री विश्वविद्यालय की यह पहल अत्यंत महत्वपूर्ण और अनुकरणीय प्रतीत होती है। विश्वविद्यालय ने अपने परिसर में अब तक डेढ़ लाख से अधिक पौधों का रोपण कर यह सिद्ध किया है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
आज श्री श्री विश्वविद्यालय देश और विदेश की अनेक औषधीय वनस्पतियों, दुर्लभ पौधों और सुव्यवस्थित हर्बल गार्डन का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। यह पुष्प प्रदर्शनी उसी दीर्घकालिक पर्यावरणीय दृष्टिकोण का विस्तार है।
यह आयोजन विशेष रूप से गुरुदेव श्री श्री रविशंकर जी के 70वें जन्म वर्ष तथा ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ संस्था की स्थापना के 45वें वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है, जिसने इसे एक विशेष आध्यात्मिक और भावनात्मक गरिमा प्रदान की है।
पहाड़ियों और खुले मैदानों में 10,000 से अधिक गमलों में खिले फूल समाज को यह मूक संदेश दे रहे हैं कि प्रकृति के साथ सामंजस्य ही मानव जीवन की वास्तविक समृद्धि है। यह प्रदर्शनी केवल सौंदर्य का उत्सव नहीं, बल्कि भविष्य की जिम्मेदारियों का भी स्मरण कराती है।
‘धरा अनुग्रह’ प्रदर्शनी ने शिक्षा और सहभागिता को भी समान रूप से महत्व दिया है। इस आयोजन में राज्य के सात अन्य विश्वविद्यालयों तथा लगभग 20 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की है।
पर्यावरण संरक्षण, पुष्प उद्यान, बागवानी और हरित नवाचार से संबंधित विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों में प्रकृति के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता को प्रोत्साहित किया गया है। साथ ही, परिसर में लगाए गए विविध स्टॉल आगंतुकों को जैविक उत्पादों, पौधारोपण तकनीकों और सतत जीवनशैली से परिचित करा रहे हैं।
पुष्प प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में कटक के मेयर सुभाष सिंह ने सहभागिता करते हुए इस आयोजन की सराहना की और यह आश्वासन दिया कि वे निश्चित रूप से कटक महानगर निगम के अधिकारियों से इस पुष्प मेले को देखने का आग्रह करेंगे, ताकि शहरी क्षेत्र में भी इस प्रकार की हरित पहल को बढ़ावा मिल सके।
विश्वविद्यालय की कुलाध्यक्षा प्रोफेसर रजिता कुलकर्णी ने अपने संबोधन में श्री श्री विश्वविद्यालय द्वारा स्थानीय क्षेत्र में किए जा रहे निरंतर पर्यावरण संरक्षण प्रयासों को रेखांकित किया और इसे सामाजिक उत्तरदायित्व का सशक्त उदाहरण बताया।
इस अवसर पर ओयूएटी (बीटीसी) की पूर्व निदेशिका प्रोफेसर (डॉ.) शशिकला बेउरा, विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) तेजप्रताप, कुलसचिव प्रोफेसर (डॉ.) अनिल शर्मा, कार्मिक निदेशक स्वामी सत्यचैतन्य तथा विभागीय डीन प्रोफेसर (डॉ.) एस. कुमारस्वामी जैसे विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।
मंच संचालन डॉ. बुलबुल ववलीना द्वारा किया गया और सभी अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन कर पाँच दिवसीय पुष्प प्रदर्शनी का विधिवत शुभारंभ किया।
समग्र रूप से देखा जाए तो ‘धरा अनुग्रह’ पुष्प प्रदर्शनी केवल फूलों की सजावट नहीं, बल्कि यह एक विचार है, एक दृष्टि है और एक संदेश है। यह संदेश है कि यदि मनुष्य प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और करुणा का भाव विकसित करे, तो धरती भी अपने अनुग्रह से जीवन को सौंदर्य, संतुलन और समृद्धि से भर सकती है।
श्री श्री विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए यह प्रेरणा छोड़ता है कि सच्ची प्रगति वही है, जो प्रकृति के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़े।
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