समग्र स्वास्थ्य और सतत भविष्य की ओर एक वैचारिक यात्रा: श्री श्री विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन HORIZON-25
इक्कीसवीं
सदी के तीसरे दशक में प्रवेश कर चुका विश्व आज अनेक विरोधाभासों के बीच खड़ा है।
एक ओर अभूतपूर्व तकनीकी प्रगति, डिजिटल क्रांति और चिकित्सा
विज्ञान की नई ऊँचाइयाँ हैं, तो दूसरी ओर बढ़ता मानसिक तनाव,
जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ, सामाजिक असमानता
और पर्यावरणीय संकट मानवता के सामने गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहे हैं। ऐसे समय
में स्वास्थ्य को केवल रोगों के उपचार या अस्पतालों की चारदीवारी तक सीमित मानना न
केवल अधूरा, बल्कि खतरनाक भी हो सकता है। स्वास्थ्य अब एक
बहुआयामी अवधारणा बन चुका है, जिसमें शरीर, मन, समाज, पर्यावरण और
चेतना—सभी का समन्वय अनिवार्य हो गया है।
इसी व्यापक और समग्र दृष्टिकोण की
आवश्यकता को रेखांकित करते हुए, ओड़िशा की पावन धरती पर स्थित
श्री श्री विश्वविद्यालय में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन HORIZON-25 एक महत्त्वपूर्ण वैचारिक
हस्तक्षेप के रूप में सामने आया। यह सम्मेलन केवल अकादमिक विमर्श का मंच नहीं था,
बल्कि यह एक ऐसी बौद्धिक यात्रा थी, जिसमें
विज्ञान, करुणा, तकनीक, परंपरा और सतत विकास एक-दूसरे से संवाद करते हुए मानवता के स्वस्थ भविष्य
की रूपरेखा गढ़ रहे थे।
कटकर स्थित श्री श्री विश्वविद्यालय के अंतर्गत श्री श्री कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं फैकल्टी ऑफ हेल्थ एंड वेलनेस द्वारा आयोजित यह तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “होलिस्टिक ऑप्टिमाइज़ेशन रैलीइंग इनिशिएटिव्स एंड ज़ेनिथ ऑफ नर्चरिंग हेल्थकेयर एंड एसडीजी अटेनमेंट” विषय पर आधारित था। विषय स्वयं में यह संकेत देता है कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल समस्याओं की पहचान करना नहीं, बल्कि समाधान की दिशा में ठोस पहल को प्रेरित करना था।
सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति तभी संभव है, जब स्वास्थ्य को नीतियों,
शिक्षा, तकनीक और सामाजिक चेतना के केंद्र में
रखा जाए।
सम्मेलन के उद्घाटन के साथ ही यह
स्पष्ट हो गया कि HORIZON-25 एक साधारण आयोजन नहीं, बल्कि एक व्यापक वैचारिक मंच है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR)
के अंतर्गत राष्ट्रीय प्रतिरक्षारक्तविज्ञान संस्थान (NIIH) के पूर्व निदेशक प्रो. (डॉ.) कंजाक्ष घोष की मुख्य अतिथि के रूप में
उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज
की सबसे बड़ी चुनौती नई बीमारियों का इलाज खोजने से अधिक, समाज
को बीमार होने से बचाना है। उन्होंने समग्र स्वास्थ्य को सामाजिक स्थिरता, आर्थिक प्रगति और मानवीय गरिमा से जोड़ते हुए इसे सतत विकास की आत्मा
बताया।
HORIZON-25 को देश-विदेश से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली। सम्मेलन में 450 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें भारत के 10 से अधिक राज्यों के साथ-साथ बांग्लादेश, नेपाल, स्वीडन और इंग्लैंड जैसे देशों से आए शिक्षाविद, शोधकर्ता, चिकित्सक, नर्सिंग विशेषज्ञ और स्वास्थ्य नीति निर्माता शामिल थे।
यह बहुराष्ट्रीय सहभागिता इस बात
का प्रमाण थी कि समग्र स्वास्थ्य और SDGs आज किसी एक देश या
क्षेत्र का विषय नहीं, बल्कि वैश्विक चिंता और साझा
जिम्मेदारी बन चुके हैं।
सम्मेलन में 15 से अधिक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक और पेशेवर संस्थानों की सक्रिय भागीदारी रही। यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन (यूके), फार वेस्टर्न यूनिवर्सिटी (नेपाल), मिड स्वीडन यूनिवर्सिटी (स्वीडन), इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ओड़िशा चैप्टर, इंटरनेशनल कमीशन ऑन ऑक्यूपेशनल हेल्थ (ICOH) और ICSSR जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की सहभागिता ने सम्मेलन की अकादमिक विश्वसनीयता और अंतरराष्ट्रीय स्तर को और अधिक सुदृढ़ किया।
सम्मेलन को INC
एवं ONMRC द्वारा 3 क्रेडिट
(15 CNE) से मान्यता मिलना इस बात का संकेत था कि यह आयोजन न
केवल वैचारिक रूप से, बल्कि व्यावसायिक और शैक्षणिक दृष्टि
से भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण था।
सम्मेलन के दौरान एक ऐतिहासिक और दूरगामी महत्त्व की उपलब्धि के रूप में श्री श्री कॉलेज ऑफ नर्सिंग और पुणे स्थित MKSSS BTINE नर्सिंग कॉलेज के बीच शैक्षणिक एवं शोध सहयोग हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
यह समझौता भविष्य में संयुक्त शोध परियोजनाओं,
छात्र-शिक्षक विनिमय कार्यक्रमों और नवाचार आधारित नर्सिंग शिक्षा
को नई दिशा देगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की संस्थागत साझेदारियाँ ही
स्वास्थ्य शिक्षा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और प्रासंगिक बना सकती हैं।
तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान कुल 23 सुव्यवस्थित वैज्ञानिक सत्र आयोजित किए गए, जिनमें कीनोट सत्र, प्लेनरी सत्र, लीड साइंटिफिक सत्र, मौखिक शोध पत्र प्रस्तुतियाँ, पोस्टर सत्र और संगोष्ठियाँ शामिल थीं। सम्मेलन में 69 मौखिक शोध पत्र और 24 पोस्टर प्रस्तुतियाँ प्रस्तुत की गईं।
विशेष रूप से युवा शोधकर्ताओं, नर्सिंग शिक्षकों और
विद्यार्थियों को अपने शोध और नवाचार साझा करने का अवसर मिला, जिससे सम्मेलन में नई ऊर्जा और भविष्य की संभावनाएँ स्पष्ट रूप से दिखाई
दीं।
सम्मेलन का उद्घाटन सत्र अत्यंत गरिमामय और प्रेरणादायक रहा। इस सत्र की अध्यक्षता प्रो. (श्रीमती) रजिता कुलकर्णी, कुलपति प्रो. (डॉ.) तेज प्रताप और कार्यवाहक कुलसचिव प्रो. (डॉ.) अनिल शर्मा ने संयुक्त रूप से की।
उन्होंने अपने संबोधन में श्री श्री विश्वविद्यालय की समग्र, नैतिक और सतत स्वास्थ्य देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया और कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विश्वविद्यालयों को समाज के साथ गहरे स्तर पर जोड़ने का कार्य करते हैं।
उद्घाटन सत्र के प्रमुख वक्ताओं में डॉ.
जयंत कुमार पांडा, डॉ. श्याम पिंगले, प्रो.
(डॉ.) साबू एस. पद्मदास, डॉ. के. मदन गोपाल और डॉ. अनिमेष
बिस्वास शामिल रहे, जिन्होंने स्वास्थ्य नीति, सार्वजनिक स्वास्थ्य और वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों पर सारगर्भित विचार
रखे।
सम्मेलन के प्लेनरी सत्रों में डॉ.
दिव्यांग शाह, डॉ. सुब्रत घोष, डॉ. गुरुप्रसाद
जी, डॉ. कृष्णेंदु मुखोपाध्याय, डॉ.
राजश्री आर. और डॉ. एन. शिवा ने अपने शोध और अनुभवों के आधार पर स्वास्थ्य,
तकनीक और समाज के जटिल संबंधों को विस्तार से प्रस्तुत किया। इन
सत्रों में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि तकनीकी नवाचार तभी सार्थक है, जब वह मानवीय मूल्यों और सामाजिक न्याय के साथ जुड़ा हो।
HORIZON-25 का द्वितीय दिवस विशेष रूप से “माइंडफुलनेस, चिकित्सा एवं सार्थक नवाचार” विषय को समर्पित रहा। इस दिन प्रौद्योगिकी, व्यावसायिक स्वास्थ्य और न्यूरो-विकास जैसे विषयों पर गहन शैक्षणिक विमर्श हुआ। प्रो. (डॉ.) कृष्णा निर्मल्य सेन ने तकनीकी समाधानों के माध्यम से व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि कार्यस्थल पर स्वास्थ्य और सुरक्षा केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा का प्रश्न है।
डॉ. स्रीजॉय पटनायक ने रोबोटिक शल्य चिकित्सा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता
की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि कैसे AI भविष्य में
सर्जरी को अधिक सटीक, सुरक्षित और सुलभ बना सकता है। वहीं
डॉ. अनुरूपा सेनापति ने ऑटिज़्म में प्रारंभिक हस्तक्षेप के महत्व को वैज्ञानिक
तथ्यों और सामाजिक संदर्भों के साथ प्रस्तुत किया।
द्वितीय दिवस के अन्य सत्रों में
प्रो. (डॉ.) कौस्तुव दलाल, डॉ. तीर्थंकर घोष, डॉ. एल्सा
सनतोम्बी देवी, डॉ. जोइता मंडल और डॉ. प्रदीप कुमार पांडा ने
सतत विकास लक्ष्य, भारतीय ज्ञान प्रणालियाँ, नर्सिंग शिक्षा और समान एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं जैसे विषयों पर विचार
साझा किए। इन चर्चाओं ने यह स्पष्ट किया कि पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के
समन्वय के बिना समग्र स्वास्थ्य की कल्पना अधूरी है।
सम्मेलन के अंतर्गत व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, सहयोगी एवं एकीकृत स्वास्थ्य, ई-हेल्थ और स्वास्थ्य सेवा प्रबंधन जैसे विषयों पर समानांतर सत्र आयोजित किए गए।
इन सत्रों में देशभर से आए संकाय सदस्य, चिकित्सक, शोधकर्ता और विद्यार्थी सक्रिय रूप से शामिल हुए।
विचारों का यह
आदान-प्रदान सम्मेलन की अंतःविषय प्रकृति को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता रहा।
पोस्टर सत्र-2 में उभरते हुए शोध कार्यों का प्रदर्शन किया गया, जहाँ युवा शोधकर्ताओं ने अपने नवीन विचारों और प्रयोगों को विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किया।
संगोष्ठियों में योग और फिटनेस की स्थिरता, ई-हेल्थ नवाचार और समग्र कैंसर देखभाल जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ।
इन चर्चाओं ने यह
संदेश दिया कि स्वास्थ्य केवल इलाज नहीं, बल्कि जीवन की
समग्र गुणवत्ता से जुड़ा विषय है।
सम्मेलन का सांस्कृतिक पक्ष भी उतना ही प्रभावशाली रहा। द्वितीय दिवस की सांस्कृतिक संध्या में देश और राज्य के विभिन्न प्रांतों से आए प्रतिभागियों ने नृत्य और संगीत की मनोहारी प्रस्तुतियाँ दीं।
विशेष रूप से पश्चिम ओड़िशा का सम्बलपुरी नृत्य-संगीत दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
वाद्य यंत्रों की सजीव प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध किया कि संस्कृति
और कला भी मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक संतुलन का अभिन्न हिस्सा हैं।
सम्मेलन का समापन सत्र कटक बारबाटी की विधायक सोफिया फिरदौस की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुआ। अपने संबोधन में उन्होंने स्वास्थ्य, सामाजिक समावेशन और नीति-निर्माण के बीच के संबंधों को रेखांकित किया और इस प्रकार के आयोजनों को समाज के लिए अत्यंत आवश्यक बताया।
सान्ध्य भोज के साथ इस तीन दिवसीय मेगा सम्मेलन का औपचारिक समापन हुआ, किंतु इसके विचार, संवाद और प्रेरणाएँ प्रतिभागियों
के मन में लंबे समय तक जीवित रहीं।
अंततः HORIZON-25 इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि माइंडफुलनेस, आधुनिक प्रौद्योगिकी, पारंपरिक ज्ञान और प्रमाण-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का समन्वय ही एक स्वस्थ, समावेशी और सतत भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।
कुल मिलाकर,
यह सम्मेलन न केवल अत्यंत सफल और प्रेरणादायक रहा, बल्कि इसने समग्र स्वास्थ्य, अनुसंधान और सतत विकास
के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करते हुए वैश्विक संवाद को एक नई दिशा प्रदान की।
HORIZON-25 की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसने स्वास्थ्य
को केवल चिकित्सकीय परिप्रेक्ष्य से नहीं, बल्कि सामाजिक,
आर्थिक और सांस्कृतिक संदर्भों में देखने की दृष्टि विकसित की।
सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में बार-बार यह बात उभरकर सामने आई कि यदि स्वास्थ्य
नीतियाँ जमीनी सामाजिक यथार्थ से जुड़ी नहीं होंगी, तो वे
दीर्घकालिक प्रभाव नहीं छोड़ पाएँगी। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सतत
विकास लक्ष्य केवल सरकारी दस्तावेज़ों तक सीमित न रहकर, शैक्षणिक
संस्थानों, स्वास्थ्य पेशेवरों और आम नागरिकों की साझा जिम्मेदारी
बनें।
सम्मेलन के दौरान नर्सिंग शिक्षा और उसकी बदलती भूमिका पर भी गंभीर विमर्श हुआ। विशेषज्ञों ने माना कि नर्सिंग केवल एक पेशा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली की रीढ़ है। डिजिटल हेल्थ, टेलीमेडिसिन, सामुदायिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में नर्सिंग पेशेवरों की भूमिका भविष्य में और अधिक महत्वपूर्ण होने जा रही है।
इसी संदर्भ में
श्री श्री कॉलेज ऑफ नर्सिंग और MKSSS BTINE नर्सिंग कॉलेज,
पुणे के बीच हुआ MoU एक दूरदर्शी कदम के रूप
में देखा गया, जो न केवल अकादमिक सहयोग को बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक मानकों के अनुरूप नर्सिंग शिक्षा को सशक्त करेगा।
HORIZON-25 ने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीकी नवाचार अपने आप
में लक्ष्य नहीं, बल्कि साधन हैं। ई-हेल्थ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक सर्जरी और
डेटा-आधारित स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने आगाह
किया कि तकनीक तभी सार्थक होगी, जब वह अंतिम व्यक्ति तक
स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करे। ग्रामीण और वंचित समुदायों तक
गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना ही किसी भी नवाचार की वास्तविक सफलता
मानी जाएगी।
सम्मेलन में भारतीय ज्ञान प्रणालियों पर हुई चर्चाएँ विशेष रूप से
उल्लेखनीय रहीं। योग, आयुर्वेद, ध्यान और जीवनशैली आधारित
उपचार पद्धतियों को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया
गया। वक्ताओं ने कहा कि भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य परंपराएँ न केवल रोग निवारण,
बल्कि स्वास्थ्य संवर्धन का भी प्रभावी माध्यम रही हैं। यदि इन
परंपराओं को वैज्ञानिक शोध और प्रमाण-आधारित पद्धतियों के साथ समन्वित किया जाए,
तो यह वैश्विक स्वास्थ्य विमर्श को नई दिशा दे सकता है।
सम्मेलन के समानांतर सत्रों और पोस्टर प्रस्तुतियों में युवाओं की सक्रिय
भागीदारी ने यह संकेत दिया कि भविष्य की पीढ़ी स्वास्थ्य और सतत विकास के मुद्दों
को लेकर गंभीर और सजग है। युवा शोधकर्ताओं के विषय चयन में मानसिक स्वास्थ्य, कार्यस्थल
सुरक्षा, डिजिटल हेल्थ इक्विटी और सामुदायिक हस्तक्षेप जैसे
मुद्दों की प्रमुखता इस बात का प्रमाण थी कि स्वास्थ्य को अब व्यापक सामाजिक
संदर्भ में समझा जा रहा है।
सांस्कृतिक संध्या ने सम्मेलन को एक मानवीय और भावनात्मक आयाम प्रदान किया।
नृत्य, संगीत और लोक कलाओं के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि
संस्कृति भी स्वास्थ्य का अभिन्न अंग है। सामूहिक आनंद, रचनात्मक
अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक जुड़ाव मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण
भूमिका निभाते हैं। सम्बलपुरी नृत्य-संगीत की ऊर्जावान प्रस्तुति ने दर्शकों को न
केवल आनंदित किया, बल्कि ओड़िशा की सांस्कृतिक पहचान से भी
जोड़ा।
देखा जाए तो HORIZON-25 केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि
एक वैचारिक आंदोलन के रूप में उभरता है। यह आंदोलन स्वास्थ्य को अधिकार, जिम्मेदारी और जीवन-मूल्य के रूप में स्थापित करने का आह्वान करता है।
सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि आने वाले समय में स्वास्थ्य नीतियाँ तभी प्रभावी
होंगी, जब वे करुणा, समानता और सततता
के सिद्धांतों पर आधारित होंगी।
अंत में यह कहा जा सकता है कि श्री श्री विश्वविद्यालय में आयोजित HORIZON-25 ने समग्र स्वास्थ्य और सतत विकास के बीच के संबंध को केवल परिभाषित ही
नहीं किया, बल्कि उसे व्यवहारिक धरातल पर उतारने की दिशा में
ठोस संकेत भी दिए। यह सम्मेलन शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं,
नीति-निर्माताओं और स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए एक ऐसा मंच सिद्ध हुआ,
जिसने उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में नई दृष्टि और नई जिम्मेदारी
के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
HORIZON-25 यह संदेश देता है कि यदि मानवता को अपने भविष्य
को सुरक्षित, स्वस्थ और संतुलित बनाना है, तो स्वास्थ्य को विकास के केंद्र में रखना होगा। माइंडफुलनेस, विज्ञान, तकनीक, परंपरा और
सामाजिक न्याय—इन सभी का समन्वय ही उस भविष्य की नींव रख सकता है, जिसकी ओर HORIZON-25 ने एक सशक्त और आशावादी संकेत
दिया है।
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